LotoPhagi
There was a boy whose name was Pawan Kumar
Thursday, June 05, 2008
क्या
करूं
?
रो
दूँ
?
या
रुक
जाऊं
?
बढ़
जाऊं
और
देखूं
पलट
कर
फ़िर
हंसती
गीली
आंखों
से
|
क्या
करूं
?
लिख
दूँ
?
या
रुक
जाऊं
?
की
ऊड
जाए
और
आए
फ़िर
से
और
लिख
जाए
ख़ुद
से
,
फ़िर
से
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