Thursday, June 05, 2008

क्या करूं ?
रो दूँ ?
या रुक जाऊं ?
बढ़ जाऊं
और देखूं पलट कर फ़िर
हंसती गीली आंखों से |

क्या करूं ?
लिख दूँ ?
या रुक जाऊं ?
की ऊड जाए और आए फ़िर से
और लिख जाए ख़ुद से , फ़िर से

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