Thursday, July 31, 2008

oh! I see its repeating
the Rand and the Keating
And I can only wonder
coz chance is not a blunder

Tuesday, July 29, 2008

दिल ही तो है संगोखिश्त दर्द से भर आए क्यूँ
रोएंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यूँ :
ग़ालिब

एक परिणाम

हाँ यार , और क्या
फ़िर ?
फ़िर मैं भागा
जा छुपा परदे के पीछे
दो आँसू गिराए
और चुपके से एक आँख बाहर की
दो गोलियाँ चलाई
फ़िर दो और आँसू गिराए
बस